हल्की फुल्की बातें

MeenalSonal
Thu 04, 2026

शहर के पुराने बाज़ार में हल्की-हल्की चहल-पहल थी। सब्ज़ियों की खुशबू, दुकानदारों की आवाज़ें और बीच-बीच में मोलभाव की मीठी तकरार, सब मिलकर एक परिचित-सा संगीत रच रहे थे।

इसी भीड़ में सुमन और राधा, दो पुरानी सहेलियाँ, अचानक आमने-सामने आ टकराईं।

“अरे राधा! तू यहाँ?” सुमन ने मुस्कुराते हुए कहा।

“हाँ भई, बच्चों के लिए फल लेने आई थी। तू बता?” राधा ने थैले को कंधे पर ठीक करते हुए जवाब दिया।

दोनों पास की एक दुकान के किनारे खड़ी हो गईं और बातों का सिलसिला शुरू हो गया।

“आजकल के बच्चे भी ना,” सुमन ने सिर हिलाते हुए कहा, “बस मोबाइल में लगे रहते हैं। हमारे ज़माने में तो…"

“अरे छोड़, हमारे ज़माने की बात मत कर,” राधा हँस पड़ी, “हम भी कम शरारती नहीं थे!”

दोनों खिलखिलाकर हँस दीं।

थोड़ी देर बाद बातों का रुख बदल गया।

“और सुन,” राधा ने धीरे से कहा, “ये लोग ना, आजकल बहुत जल्दी जज कर लेते हैं। कौन क्या पहन रहा है, कैसे रह रहा है, सब पर टिप्पणी!”

सुमन ने तुरंत सहमति जताई, “बिलकुल सही! अरे, हर किसी की अपनी पसंद होती है। कपड़ों से किसी को जज करना कितना गलत है।”

“हाँ, हमें तो ऐसा कभी नहीं करना चाहिए,” राधा ने गंभीरता से कहा।

“बिलकुल नहीं,” सुमन ने भी हामी भरी।

इतने में दोनों की नज़र थोड़ी दूर खड़ी एक लड़की पर पड़ी। वह उनकी जान-पहचान वाली मीना की दोस्त थी—अभी कुछ ही हफ्ते पहले उसकी शादी हुई थी।

“अरे वो देख, पूजा!” सुमन ने आँखें सिकोड़ते हुए कहा।

“हाँ हाँ, वही तो है,” राधा ने गौर से देखा।

दोनों कुछ पल चुप रहीं… फिर राधा ने धीरे से कहा, “अभी-अभी शादी हुई है और देख, न कोई चूड़ा, न बिंदी ढंग की… साधारण-से कपड़े पहन रखे हैं!”

सुमन ने भी तुरंत जोड़ दिया, “हाँ, कम से कम नई-नवेली दुल्हन जैसी तो लगनी चाहिए थी… आजकल की लड़कियाँ भी ना!”

दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा… और अचानक कुछ सेकंड के लिए चुप्पी छा गई।

फिर सुमन के चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान आई।

“अरे… हम अभी क्या बात कर रहे थे?” उसने आँखें उठाकर कहा।

राधा ने भी हँसते हुए सिर पकड़ा, “कि लोगों को जज नहीं करना चाहिए…” दोनों एक पल के लिए एक-दूसरे को देखती रहीं… और फिर जोर से हँस पड़ीं।

“लगता है हमें भी थोड़ी प्रैक्टिस की ज़रूरत है,” सुमन ने मज़ाक में कहा।

“हाँ, पहले खुद को सुधारें, फिर दुनिया को समझाएँ,” राधा ने चुटकी ली।

बाज़ार की भीड़ में उनकी हँसी घुल गई, हल्की, सच्ची और थोड़ी-सी सीख भरी।

This post is a part of BlogchatterA2Z Challenge 2026

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