अभिव्यक्ति का परचम हिन्दी, संस्कृति की जननी हिन्दी, निश्चल और निराली हिन्दी, अंतर्मन की तस्वीर हिन्दी | अपनी भाषा करो अपनी भाषा पर प्यार।जिसके बिना मूक रहते तुम,रुकते सब व्यवहार। जिसमें पुत्र पिता कहता है, पत्नी प्राणाधार,और प्रकट करते हैं जिसमें तुम निज निखिल विचार। बढ़ाओ बस उसका विस्तार।करो अपनी भाषा पर प्यार। भाषा बिना […]