Category: कविताएँ

May 3, 2023
जीवन की सीख़ - प्रेरणादायक कविता

प्रकृति हमें क्या कुछ नहीं सिखाती। एक नन्ही सी चिड़िया भी हमें जीवन की अनमोल बातें सिखाती है। तो आईये जानें क्या करती है यह नन्ही नभचर और जीवन के कौनसे गुर सिखाती है? चहकने से जिसकी होती है हर दिन की शुरुवात,कर लेते हैं हम भी थोड़ी जुगलबंदी उसके साथ। नन्ही सी चिड़िया जब […]

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December 23, 2022
कालू की अंतरात्मा

अच्छी बुरी परिस्थितियाँ जीवन के चक्र को पूर्ण करती हैं और हमें बहुत सारी सीख़ दे जाती हैं। कई बार ऐसा होता है कि हम गलत रास्ते की ओर आकर्षित हो जाते हैं लेकिन हमारी अंतरात्मा हमें गलत राह पर चलने से रोक देती है। जाने क्या सूझा बटुवे को भला,जा पहुँचा कालू की जेब […]

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November 7, 2022
कुछ शब्द.....बस, कुछ शब्द

शब्दों की दुनिया बहुत विचित्र है, बहुत बड़ी भी है। अगर हम एक क्षण के लिए भी सोचें कि अगर शब्द नहीं होते तो क्या होता? तो आप कहेंगे कि फिर हम सब प्रेम कैसे दर्शाते, किसी को सहारा कैसे देते या किसी से अपने मन की बात कैसे करते। जैसे सिक्के के दो पहलू […]

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September 25, 2022
कैसे सर्व भूतः शक्ति करती मार्गदर्शन

नव दुर्गा के अनेकों रूप की महिमा बहुत अद्भुत है, यह शक्तियाँ हमारा मार्गदर्शन करती हैं और सही दिशा दिखती हैं। हमारा विश्वास अगर अड़िग होगा तो कोई भी परिस्थिति हमें डिगा नहीं सकती। तो आईये जानें कैसे सर्व भूतः शक्ति करती हमारा मार्गदर्शन। जीवन पथ कठिन परिस्थिति सरल बने जब विश्वास हो सहारा व्यापक […]

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May 9, 2022
माँ ऐसी क्यूँ होती है?

माँ हमारा व्यक्तित्व संवारती है, कभी बच्चों का हाथ थाम कर तो कभी अपने सहारे ही डोर खींच कर। आखिर "माँ तो माँ होती है "!! माँ ऐसी क्यूँ होती है? कुछ समझ आतीऔर कुछ बातें अनोखी कर जाती ।माँ सिखलाती हमें जीवन के अनेकों रंग,समय समय पर खींच कर अपने सहारे का संग। माँ […]

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May 7, 2022
पुस्तक - हमारे जीवन का अहम् हिस्सा

बचपन में जब हमारे माता पिता हमें अपने पाठ पढ़ने के लिए कहते थे तो हमें कभी कभी आलस आता था। लेकिन उन किताबों को पढ़ने में बहुत आनंद आता था जो कि स्कूल के पाठ्यक्रम से संबंधित नहीं होती थी जैसे कि कॉमिक किताबें जो हास्य के साथ साथ मज़ेदार किससे भी जोड़ दिया […]

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May 7, 2022
उम्मीदों का पिटारा

आज उम्मीदों का पिटारा ज़ोर से खनका ,पहली बार उसे देखा, डगमगाते हुए टिका ।ज़रा सा सम्भाला परंतु खाली उसे पाया ,गुम कहां उम्मीदें, सोच मन घबराया । हृदय कर रहा तांडव, मचा रहा खूब शोर ,न सुनता किसीकी चाहे कितना भी दे ज़ोर ।लडखडाते हुए करता एक ही प्रार्थना बारंबार ,अधिक जटिल न हो […]

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