नानू का हेयरकट

MeenalSonal
Thu 04, 2026

आज का दिन नानू के लिए बहुत ख़ास था, सुबह से ही कुछ अलग ही समां घर में दिख रहा था जैसे पता नहीं कोई खुशी की बात हो। रोज़ की तरह नानी सुबह-सुबह चाय की चुस्कियां ले रही थीं, और नानू की खुशी का राज तो वो भली-भांति जानती थीं, आख़िर छः महीने से जो आता था।

नानू हर बार की तरह नाई की दुकान जाने की तैयारी में थे। वे बहुत सारा समय निकाल कर ही नाई की दुकान पर जाया करते, क्योंकि वहाँ लंबी लाइन होती और करीब एक घंटा तो आम बात थी।

नानू को देख नानी उन्हें चिढ़ाती, “आपके गिने चुने चार बाल काटने में नाई को इतना कितना टाइम लगता है?

नानू हँसते हुए बोले, “ये चार बाल नहीं हैं, मेरी शान हैं, हर किसी के बस की बात नहीं! कहीं एक भी कम-ज्यादा हो गया तो स्टाइल बिगड़ जाएगा।”

नाई की दुकान कोई ज़्यादा फैंसी नहीं थी। एक लाइन से लगी चार लाल रंग की कुर्सियां, सामने बड़ा सा आईना जिसे हर थोड़ी देर में चमकाया जाता था, और दूसरी तरफ दीवार पर टंगे फिल्मी हीरो के पोस्टर, जिनके हेयरस्टाइल देखकर ही लगता था कि यहाँ स्टाइल का मतलब कुछ अलग ही है।

नानू हर बार की तरह आराम से अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे। दुकान में बैठे बाकी लोग भी अपने-अपने किस्सों में लगे हुए थे। कोई राजनीति पर चर्चा कर रहा था, तो कोई अपनी चिंता में डूबा था। बीच-बीच में रेडियो पर पुराने गाने बज रहे थे, और नाई बड़े ध्यान से किसी के बालों को ऐसे तराश रहा था जैसे कोई कलाकार मूर्ति बना रहा हो।

तभी एक मज़ेदार घटना हो गई।

दुकान में बैठे एक आदमी की बारी आई और उसने नाई से कहा, “मुझे बिलकुल हीरो जैसा हेयरकट चाहिए।”
नाई ने भी बड़े आत्मविश्वास से सिर हिलाया और काम में लग गया। थोड़ी देर बाद जब कटिंग पूरी हुई, तो आदमी ने आईने में खुद को देखा और उसका चेहरा उतर गया।

“अरे! ये क्या कर दिया?” उसने घबराकर कहा।
नाई बोला, “आपने हीरो जैसा कहा था मैंने अपने हिसाब से बना दिया!”

यह सुनते ही दुकान में बैठे सभी लोग ठहाके मारकर हँस पड़े। नानू भी अपनी हँसी नहीं रोक पाए। उन्होंने मज़ाक में कहा, “भाई, यहाँ हीरो बनने का रिस्क मत लो, जो है उसी में खुश रहो!”

आखिरकार नानू की बारी आई। नाई ने उन्हें देखते ही मुस्कुरा कर कहा, “आइए, आज तो खास तैयारी करनी पड़ेगी।”
नानू ने गर्व से कहा, “हाँ भाई, मेरे बाल कोई मामूली नहीं हैं।”

नाई ने बड़े ध्यान से काम शुरू किया, पहले कंघी से हर बाल को सही जगह पर जमाया, फिर कैंची से धीरे-धीरे ट्रिम करने लगा। कभी आगे से देखता, कभी पीछे से, जैसे कोई कलाकार अपनी सबसे कीमती पेंटिंग बना रहा हो।

करीब आधे घंटे बाद नाई ने कहा, “लो जी, हो गया आपका स्पेशल हेयरकट।”

नानू ने आईने में खुद को देखा और चेहरे पर एक संतुष्टि भरी मुस्कान आ गई। सच में, उनके बाल इतने सलीके से सेट थे कि लग रहा था जैसे हवा भी उन्हें बिगाड़ने से पहले इजाज़त लेगी।

दुकान से निकलते हुए नानू की चाल-ढाल ही बदल गई थी, थोड़ा सीना तानकर, थोड़ा गर्दन ऊँची करके रवाना हो गए। घर पहुँचते ही नानी ने देखा और मुस्कुराते हुए बोली, “वाह! आज तो बड़े हैंडसम लग रहे हो, चारों बाल सही सलामत हैं!”

नानू हँसते हुए बोले, “देखा, कहा था ना, हर किसी के बस की बात नहीं है!”

घर में फिर वही सादगी भरा माहौल लौट आया, लेकिन आज नानू के चेहरे की खुशी कुछ अलग ही थी। छोटे-छोटे लम्हों में छुपी यही खुशियाँ ही तो उस ज़माने की असली दौलत थीं, जहाँ एक साधारण-सा हेयरकट भी पूरे दिन को ख़ास बना देता था।

This post is a part of BlogchatterA2Z Challenge 2026

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