शब्दों की दुनिया बहुत विचित्र है, बहुत बड़ी भी है। अगर हम एक क्षण के लिए भी सोचें कि अगर शब्द नहीं होते तो क्या होता? तो आप कहेंगे कि फिर हम सब प्रेम कैसे दर्शाते, किसी को सहारा कैसे देते या किसी से अपने मन की बात कैसे करते। जैसे सिक्के के दो पहलू होते हैं बिलकुल वैसे ही, अगर शब्द नहीं होते तो शायद सबके दिल एक होते, कोई भेद भाव नहीं होते क्योंकि हम सारी बातें मन में ही छुपा जाते।
कुछ शब्द उजियारा फैलाते हैं,
कुछ शब्द परिर्वतन लाते हैं,
कुछ शब्द इतिहास रचाते हैं,
कुछ शब्द हमें महान् बनाते हैं।
कुछ शब्द दिल को चुभ जाते हैं,
कुछ शब्द हमें ढेस पहुँचाते हैं,
कुछ शब्द हमें सदा आंकते हैं,
कुछ शब्द आक्रोश फैलाते हैं।
कुछ शब्द संपूर्णता का एहसास कराते हैं,
कुछ शब्द सही गलत की पहचान कराते हैं,
कुछ शब्द अंतर समाप्त कर जाते हैं,
कुछ शब्द दो मन मिला जाते हैं।
कुछ शब्द सीमा पार कर जाते हैं,
कुछ शब्द समय के साथ बदल जाते हैं,
कुछ शब्द भ्रमित कर जाते हैं,
कुछ शब्द भेद भाव सिखलाते हैं।
कुछ शब्द जीवन के साज बन जाते हैं,
कुछ शब्द हमें सबसे आगे ले जाते हैं,
कुछ शब्द सपनों को पंख दे जाते हैं,
कुछ शब्द चेहरे पर मुस्कान लाते हैं।
कुछ शब्द कभी समझ नहीं आते हैं,
कुछ शब्द अकेले ही रह जाते हैं,
कुछ शब्द कभी मेल नहीं खाते हैं,
कुछ शब्द आंखों में आँसू दे जाते हैं।
कुछ शब्द कभी कहे नहीं जाते हैं,
कुछ शब्द आंखों की बोली बन जाते हैं,
कुछ शब्द दिलों के तार छू जाते हैं,
कुछ शब्द अनोखा भाव दे जाते हैं।
कुछ शब्द मन परिवर्तन कर जाते हैं,
कुछ शब्द दृष्टिकोण बदल देते हैं,
कुछ शब्द समय का मोल समझाते हैं,
कुछ शब्द नई ऊर्जा लाते हैं।
कुछ शब्द समन्दर से गहरे होते हैं,
कुछ शब्द निर्मलता का बखान करते हैं,
कुछ शब्द आदर्शों को सिखलाते हैं,
कुछ शब्द किसी का सहारा बन जाते हैं।
कुछ शब्द हम कभी कह नहीं पाते हैं,
कुछ शब्द गहरा राज़ छुपा जाते हैं,
कुछ शब्द बेड़ियों को तोड़ जाते हैं,
कुछ शब्द आज़ादी की ललकार बन जाते हैं।
कुछ शब्द मिलकर वाक्य बन जाते हैं,
कुछ शब्द विराट रूप ले पाते हैं,
कुछ शब्द बस कहीं लुप्त हो जाते हैं,
कुछ शब्द टकराकर वापस लौट आते हैं।
कुछ शब्द, बस….... कुछ शब्द,
जीवन के विचित्र रंग दिखलाते हैं।