आपने कई बार अनुभव किया होगा एक ऐसी शक्ति जो जाने कहाँ से आप में नई ऊर्जा भर देती है। या ऐसे चमत्कार जो हमारे बिगड़े काम एक क्षण में पूर्ण कर देते हैं। प्रकृति की अद्भुत रचनाएँ हमें अक्सर अचंबित कर देती हैं। तो क्या आप भी मानते हैं कि ऐसा कुछ तो है जो हमारे साथ है, जो हमें पूर्ण करता है, जो हमें निरंतर सिखाता रहता है। हाँ, कुछ तो है….
कुछ तो है…
उन विशाल सागर की गहराइयों में,
उन समुद्र के विचित्र जीवों में,
उन अनंत जलाशयों के कौतूहल में,
निरंतर तट से टकराती लहरों में,
कुछ तो है।
कुछ तो है…
उन नीले अंबर की ऊंचाइयों में,
उन सफेद बादलों की कतारों में,
उन सूरज की तीव्र किरणों में,
लालिमा का आँचल ओढ़े नभ में,
कुछ तो है।
कुछ तो है…
उन अनकही बातों में,
उन पलों के एहसासों में,
उन बेसब्र नीली आंखों में,
मीठी सी मंद मुस्कुराहटों में,
कुछ तो है।
कुछ तो है…
उन अनदेखी अटूट क्षमताओं में,
उन अंधकार को ध्वस्त करते चिरागों में,
उन इच्छाशक्ति से भरे मन में,
गिर कर फिर से उठ जाने में,
कुछ तो है।
वह कुछ तो है…
अमूल्य, अतुल्य, सबसे परे,
इच्छा, क्रिया, ज्ञान की शक्ति,
पारदर्शी अंतर्मन के समीप,
आत्मविश्वास से अभिपूर्ण,
कुछ तो है,
हाँ, वह कुछ तो है।
जहाँ होनी थी बेफिक्री सी जिंदगी,
वहाँ ठानी कमाने अनमोल रोटी।
जहाँ एक एक पल बिताना था खेल में,
वहाँ झोंक दिया बचपन काम की व्यस्तता में।
जिन हाथों में कलम थी पकड़ानी,
वहाँ इन्होंने पकड़ा दी जीवन की अनगिनत परेशानी।
जहाँ लाड़ के स्वर पड़ने थे कानों में,
वहाँ हर ओर थी डांट डपट की पुकारें।
जहाँ बालपन में करनी थी मासूम गलतियाँ,
वहाँ सुनी अनजानों की कड़वी बोलियाँ।
जहाँ अनगिनत स्वप्न सजाने थे आंखों में,
वहाँ दिखा मुश्किलों का सैलाब रात के अंधेरे में।
कर्म जो इन नन्हे हाथों से करवाए,
वह दूर खड़ा क्यों मुस्कुराए?
नहीं चाहिए इन नन्हे हाथों की कमाई,
जो छीन लेती बचपन की परछाई।
लघु से बचपन के यह कुछ सुनहरे पल,
जी लेने दो इन्हें मस्ती में निश्चल।
बाल श्रम एक ऐसी समस्या है जो देश के उज्जवल भविष्य पर एक ढ़ाल बनकर खड़ी है। जहां बच्चों को अपना बचपन खेलकूद और पढाई में व्यतीत करना चाहिए वहीं कुछ परिवार पेट भरने के लिए उनके नादान कंधों पर काम का बोझ डाल देते हैं। यह कब मजबूरी से लाचारी का रूप ले लेती है, उस परिवार को भी पता नहीं चलता। आक्रोश तब जाग उठता है जब पढ़े लिखे लोग बाल श्रम को बढ़ावा देते हैं उनको नौकरी देकर।
पिछले तीन दशकों में यह स्थापित हो गया है कि बाल श्रम का उन्मूलन किया जा सकता है। हमें केवल मूल समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने और उन्हें हल करने में मदद करने की आवश्यकता है। इस वर्ष की थीम 'सभी के लिए सामाजिक न्याय तथा बाल श्रम का अंत' जैसी मूल समस्याओं पर केंद्रित है जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुशिक्षित भविष्य सुनिश्चित कर सके। बाल श्रम जैसे अभिशाप को जड़ से समाप्त करने की जागरूकता फैलाने के लिए प्रत्येक वर्ष १२ जून को बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है।
आईये जागरूक बनें और बाल श्रम को जड़ से मिटा दें।
बदलाव जीवन का स्त्रोत है, और अच्छा बदलाव जीवन की परिभाषा ही बदल देता है।
लेकिन हमने अक्सर देखा है कि हम किसी भी प्रकार के बड़े छोटे बदलाव को अपनाने से डरते हैं। हम हमेशा हिचकते हैं कुछ नया अपने जीवन में शामिल करने से, या फिर किसी चीज़ का अपने जीवन से त्याग करने से।
फिर चाहे वह एक तुच्छ बदलाव ही हो। शायद ऐसा इसीलिए है क्योंकि हमें लगता है कि क्या नया स्वरूप अच्छा होगा? इसके परिणाम कैसे होंगे? फिर हमारी नकारात्मक ऊर्जा बहुत तीव्र हो जाती है और फिर हम उसी समय सारणी के साथ चलते रहते हैं।
बदलाव बड़े स्तर पर हो या बहुत छोटा, हर नई चीज़ अपने साथ नई चुनौतियाँ लाती है। किन्तु यह सब कुछ पलों के लिए या फिर कुछ दिनों के लिए ही होता है, लेकिन उनके सकारात्मक प्रभाव हमें बाद में ही पता चलते हैं।
हम सबको यही सोचकर चलना चाहिए कि जो कुछ भी होता है अच्छे के लिए ही होता है। इसी सोच को अपना मित्र बनाकर कार्य करते रहने चाहिए। हर नए पल को दोनों हाथों से बटोर कर उसका भरपूर आनंद लेना चाहिए।
तो चलिए जानें वो पाँच आदतें जो आपके जीवन में बदलाव ला सकती हैं:
१. अपने लक्ष्य को लिखें
२. अपना पसंदीदा काम करें
३. अच्छी सोच रखें
४. ना बोलना सीखें
५. अपने आप पर विश्वास रखें
छोटे लक्ष्य बनाएँ, जिन्हें तय करना सरल हो। जैसे अपने काम को तय समय में ख़त्म करना या फिर जो कार्य आप बहुत समय से करना चाहते हैं उसे पूर्ण करना।
जब हमारे कार्य लिखित में हमारे सामने होते हैं तो वे हमें एक चुनौती जैसे दिखाए देते हैं। कार्य पूर्ण होने पर जब हम उस कार्य पर टिक लगाते हैं तो बहुत उत्साहित महसूस करते हैं। साथ ही आप अपने लिस्ट के अगले लक्ष्य की ओर तुरंत केंद्रित हो जाते हो।
अक्सर ऐसा होता है की हम उन कार्यों में उलझ कर रह जाते हैं जो हमें कम पसंद होते हैं और हमारे रुचि के कार्यों के लिए समय ही नहीं निकाल पाते। लेकिन अगर कुछ ठान लें तो फिर कुछ भी नामुमकिन नहीं होता। जब आप अपने लक्ष्यों को लिखें तो उसमें अपने पसंदीदा काम को ज़रूर शामिल करें। फिर देखें कैसे इस बदलाव से आपमें नई ऊर्जा आ जाती है।
आप कैसे हैं, यह आपकी सोच पर निर्भर करता है। यह बिल्कुल सत्य है; आपकी सोच आपके व्यक्तित्व को संवारती है। सकारात्मक सोच रखने वाले लोग कभी नए बदलाव से घबराते नहीं है, बल्कि उन चुनौतियों का डट कर सामना करते हैं। सकारात्मक विचार जीवन की नींव होते हैं, और हमें अपनी नींव को हिलने नहीं देना है।
जब हम बदलाव की बात कर रहें हैं तो बदलाव हमेशा कार्यों को कौशलता से करना या नए कार्यों को शामिल करना मात्र ही नहीं होता है। किन्तु कुछ कार्यों को त्यागना या फिर मना कर देना भी बदलाव का हिस्सा है।
किसी भी चीज़ के लिए कभी कभी ना कहना कठिन हो जाता है। लेकिन प्राथमिकता कार्यों को पूर्ण करने की ही नहीं बल्कि उन्हें अपनी गति से और अपने पसंदीदा काम को शामिल करना होना चाहिए। कभी कभी हम खुद को इतना व्यस्त कर लेते हैं कि हम इतने सारे कार्यों को संभाल ही नहीं पाते। अपने कार्यभार को केंद्रित रखें और साथ ही साथ अपने पसंदीदा कार्य के लिए समय ज़रूर दें।
कहते हैं कि सोच लेने से दुनिया बदल जाती है परन्तु यह पूर्ण सत्य नहीं है। आपको अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होकर काम भी करना पड़ता है और वो भी अपने आप पर अटल विश्वास के साथ। मान लीजिए की यह एक महत्वपूर्ण पूँजी है बदलाव की।
Importance of change in Life
बदलाव का पालन करना कठिन हो सकता है पर नामुमकिन नहीं। परिवर्तन का स्वागत करें, कभी-कभी कुछ नया करने की कोशिश एक उज्ज्वल परिप्रेक्ष्य का स्वागत कर सकती है। एक फलते-फूलते बदलाव का स्वागत करने के लिए समय रहते डर और दिनचर्या पर काबू पाना होगा क्योंकि यह आपके रास्ते को और अधिक सुंदर और बेहतर बना सकता है।
जीवन में हमेशा तीखे मोड़ वाले रास्ते होते हैं, लेकिन हमारे वाहन में बदलाव जिसे मन कहा जाता है, हर मोड़ को आसान बना सकता है। इस प्रकार, परिवर्तन और कुछ नहीं बल्कि एक बेहतर व्यक्ति के रूप में कायापलट करने के लिए अपनी प्राथमिकताओं को पुनर्गठित करना, परिष्कृत करना, नए सिरे से ढ़ालना है। असफलताओं को एक अलग दृष्टिकोण से देखें, आपको निश्चित रूप से एक नई शुरुआत मिलेगी जो केवल आपकी प्रतीक्षा कर रही है।