तुम इतना जो मुस्कुरा रही हो,
क्या गम है जिसको छुपा रही हो…….
आप सोच रहे होंगे मैं यह गाना क्यों गुनगुना रही हूँ। हमारे गीतों में और बोली में हम न जाने कितने भाव व्यक्त करते हैं।
हमारी सार्वजनिक दुनिया या वर्चुअल वर्ल्ड में विभिन्न भावों को दर्शाते पीले गोल मटोल चेहरे नहीं होते तो क्या होता। आपने सही समझा, मैं यहाँ इमोजी की बात कर रही हूँ।
हम सब जानते हैं कि अपने आपको अभिव्यक्त करना सार्वजनिक दुनिया में कितना जरूरी हो गया है। हम क्या सोच रहे हैं, कौनसी बात हम कैसे रखना चाहते हैं और कैसे सही मायने में बात हमारे अपनों तक पहुँच पाए यह बहुत आवश्यक है।
जब हम आमने सामने नहीं होते हैं तो यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि दूसरों के भाव हमारे भाव से मेल खा रहे हैं या नहीं। जैसे उदाहरण के तौर पर एक सोशल ग्रुप के कई सदस्य कुछ बातों को हँसी मज़ाक में लेते हैं, तो किसी किसी को वही बात बुरी लग जाती है। इसका सबसे बड़ा कारण यह कि आप किस भाव में वह मैसेज पढ़ रहे हैं। यहाँ आपका काम आसान करने के लिए इमोजी का आविष्कार हुआ।
अपने मैसेज में इमोजी को शामिल करने से कम से कम हम दूसरों को यह बता रहे हैं कि मैसेज को किस भाव या एक्सप्रेशन से पढ़ना है। तो है न एक छोटा सा इमोजी बहुत काम की चीज!
आजकल के युवा इस वर्चुअल एक्सप्रेशन से ही घिरे रहते हैं। पर ध्यान रहे की आपकी इमोजी का एक्सप्रेशन आपके एक्सप्रेशन से मेल खा रहा हो। कई बार वर्चुअल चैट में ऐसा भी होता है कि हमारे इमोजी हमारे भाव से मेल नहीं खाते। ना चाहते हुए भी कई बार हम बस कुछ रिएक्ट करने की होड़ में खुद से ही दूर हो जाते हैं।
तो फिर यह गीत तो बनता है,
तुम इतना क्यों मुस्कुरा रही हो
क्या गम है जिसको छुपा रही हो……
आप कहेंगे ऐसा तो कई बार रियल वर्ल्ड में भी हो जाता है। बिल्कुल होता है, लेकिन आप ज्यादा देर तक ढ़ोंग नहीं कर सकते और दूसरे भी आपकी दिल की बात को समझ जाते हैं क्यूंकि वे आपके असली भाव को भाँप लेते हैं। लेकिन वर्चुअल वर्ल्ड में जहाँ हम एक दूसरे को देख नहीं सकते वहां यह तय करना बहुत कठिन हो जाता है।
अगर हम एक क्षण के लिए भी सोचें की अगर चेहरे पर भाव ही नहीं दिखते तो क्या होता। में तो कहूंगी की हम सब फिर एक रोबोट की तरह लगते।
हमारे भाव बहुत कुछ कह जाते हैं। एक वक्ता अपने भाषण को जीवंत बनाने के लिए स्वरों की विविधता तथा चेहरे के भाव का उपयोग करता है। तभी तो श्रोताओं को उनको सुनने में रुचि होती है।
एक छोटी सी मुस्कुराहट कभी-कभी पूरे दिन की ऊर्जा बन जाती है। कितने विचित्र हैं यह भाव जो न जाने कितने राज़ छुपा जाते हैं और बहुत कुछ बिना कहे बता भी देते हैं। सच तो यह है कि हमारे मन के आईने हमारे भाव हैं और फिर चाहे असली दुनिया हो या वर्चुअल वर्ल्ड हमें जुड़ने और एक दुसरे को समझने के लिए भाव या इमोजी ही काम आते हैं।
इमोजी का रंग पीला क्यों होता है?
हम सब जानते हैं इमोजी की बात आते ही पीले गोल मटोल चेहरे पर तरह तरह के भाव हमारे सामने आ जाते हैं।
पर क्या आप जानना चाहेंगे पीले रंग का राज़?
पीला रंग प्रतीक होता है खुशी का, उल्लास का और इसीलिए यह रंग हमारी आंखों को आकर्षित करता है। पीला रंग विभ्योर के पिरामिड में पाँचवे स्थान पर आता है जिसकी वजह से यह रंग बहुत दूर से भी दिखाई देता है।
यह भी माना जाता है कि पीला रंग हमारे त्वचा से भी बहुत मेल खाता है इसीलिए इमोजी का रंग पीला चुना गया है।
सबसे पहली इमोजी कौनसी सी थी?
सबसे पहली इमोजी मुस्कुराने वाले भाव की थी। स्माइली चेहरे के डिज़ाइन में वास्तविक मुस्कान एक सकारात्मक व्यवहार को प्रभावित करने का काम करती है।
कहाँ और कब जन्म हुआ इमोजी का?
इमोजी का यह प्रसन्न चेहरा असल में एक बीमा उधोग की देन है। अक्सर लोग बीमा करवाने कई विपरीत परिस्थितियों में ही जाते हैं तो यह कंपनी अपने ग्राहकों को खुशी के दो पल देने के लिए इस आकर्षित करने वाले पीले प्रसन्न चेहरे को अपनी कंपनी का हिस्सा बनाया। तो इस तरह पीले स्माइली चेहरे का जन्म 1963 में वॉर्सेस्टर, मैसाचुसेट्स में हुआ।
वहाँ से इस स्माइली चेहरे ने बहुत सफर तय किए और और आज यह हमारे फोन में हमारे करीब हैं।
तो मुस्कुराते रहिए इस स्माइली इमोजी की तरह और देखिए जिंदगी कितनी आसान और खुश हाल हो जाएगी।