हमारी प्रकृति अद्भुत है, अनोखी है अनमोल है जो हमें मोहित कर देती है | प्रकृति के बीच मन शांत और ताज़ा महसूस करता है। चिड़ियों के कलरव, कल कल करती नदियां, हवाओं की साएं साएं , फूलों पर भिनभिनाता भौंरा, या तालाब में किनारे टर्र-टर्र करते मेंढक, प्रकृति की हर रचना अपनी एक अद्वितीय ध्वनि से जुड़ी है।
अगर हम शांत मन से सुनें तो प्रकृति से उत्पन्न ध्वनियां हमारे मन को मुग्ध कर देती हैं। किंतु क्या आप जानते हैं यह ध्वनियां आई कहां से, इसका स्त्रोत क्या है?
हमारे पुराणों के अनुरूप प्रकृति के रचयिता ब्रह्मा जी हैं। उन्होंने पृथ्वी के जीव जंतुओं को भिन्न भिन्न आकारों में ढाला और संवरा। ऐसा माना जाता है की ब्रह्मा जी सृष्टि की रचना को देख कर खुश नहीं थे। उन्हें अपनी बनाई हुई श्रृष्टि बहुत सूनी लग रही थी। उन्होंने विष्णु जी से अपनी बात कही तब विष्णु जी ने उन्हें मां सरस्वती की सहायता लेने को कहा।
ब्रह्मा जी ने सरस्वती जी का आहवान किया और अपनी सहायता करने को कहा। तब माता सरस्वती ने अपनी वीणा से विभिन्न ध्वनियां उत्पन्न की जिससे श्रृष्टि में मधुर ध्वनियों का प्रवाह हुआ। इसी कारण सरस्वती मां को (वाणी की देवी) वाग्देवी भी कहा जाता है। माता सरस्वती सिखलाती हैं कि हमें अपनी वाणी को हमेशा मधुर रखनी चाहिए।
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वसंत पंचमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। मां सरस्वती वसंत पंचमी के दिन प्रकट हुई थी, इसी कारण इस दिन को मां के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। मां सरस्वती वाणी, विद्या, ज्ञान-विज्ञान एवं कला-कौशल आदि की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं। वे मनुष्य को ज्ञान तथा कला के प्रकाश की ओर ले जाती हैं।
“सरस्वतीं च तां नौमि वागधिष्ठातृदेवताम् ।
देवत्वं प्रतिपद्यन्ते यदनुग्रहतो जना: ॥”
– सरस्वती वंदना श्लोकअर्थ- वाणी की देवी माता सरस्वती जी को नमस्कार, जिनके आशीर्वाद मात्र से मानव देव समान हो जाता है।
अक्सर देखा गया है कि लोग बसंत और वसंत पंचमी में से क्या सही है इसको समझाना चाहते है , तो देखते है की इन शब्दों में कोई अंतर है या नहीं। बसंत और वसंत दोनों ही सही है, वसंत संस्कृत शब्द है और वही बसंत हिंदी जिसका अर्थ है वसंत ऋतु।
पीले रंग को हिंदू धर्म में एक शुभ रंग माना जाता है और वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा के दौरान इसका विशेष महत्व है। पीला रंग देवी सरस्वती से जुड़ा हुआ है क्योंकि यह उनका पसंदीदा रंग है। पीला रंग ज्ञान, समझ और बुद्धिमत्ता का रंग है, जो सभी देवी से जुड़े हुए हैं।
आइए वसंत पंचमी के दिन हम सभी माता सरस्वती से यह आशीर्वाद मांगे की हम सब पर सदा ऐसे ही ज्ञान, वाणी और कला का आर्शीवाद बनाएं रखें और इस कौशल का सही रूप में उपयोग करने की शक्ति प्रदान करें।
आज साहित्य, कला और संस्कृति का हमारे जीवन में बड़ा ही महत्व है जो मानव जीवन को एक सकारात्मक दिशा की ओर केंद्रित करते हैं। यह हमारा पहला लेख है। हमारा प्रयास रहेगा हम साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़ी रोचक बातें आपके लिए लेकर आएं।
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कभी-कभी बातचीत से ही कई कठिनाइयों के हल निकल आते हैं। आपस में चर्चा करके, एक दूसरे के अनुभव से प्रेरणा लेकर चुनौतियों पर विजयी प्राप्त किया जा सकता है। एक सकारात्मक संवाद ज्ञान के भंडार खोल देते हैं।
परीक्षा हर विद्यार्थी के जीवन का अहम हिस्सा है। परीक्षाएँ एक विद्यार्थी के आत्मविश्वास और कौशल का विकास करती हैं। परीक्षा या परीक्षण एक मापदंड है जहां विद्यार्थी अपने छुपे कौशल को तराशते और उभारते हैं। एक तय समय में एक पाठ्यक्रम को पूर्ण कर विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी करते हैं जो उन्हें समय का मोल और स्मरण शक्ति के गुर सिखाते हैं जो उनके साथ आजीवन चलते हैं।
चाहे सामान्य वार्षिक स्कूल की हो या फिर बोर्ड परीक्षा वह अपने साथ विद्यार्थियों के मन में कौतूहल मचा देती है। माना के हर विद्यार्थी के लिए परीक्षा प्रश्नों के जवाब तय समय में हल करने मातृ भर ही नहीं बल्कि और भी बहुत कुछ है। मानसिक तनाव और चिंता छात्रों को मुख्य रूप से परेशान करने लगती है। लेकिन परीक्षा के पूर्व मन का शांत होना और एकाग्र होना बहुत जरूरी है। इसी कौतुहल को एक दिशा दिखाने, विद्यार्थियों के मन में उमड़ रहे अनगिनत सवालों के जवाब देने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए परीक्षा पे चर्चा की शुरुआत की हमारे माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने। हर साल बोर्ड की परीक्षा से पहले मोदी जी बच्चों से चर्चा करते हैं और छोटे छोटे सुझावों से बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं।
परीक्षा प्रतिस्पर्धा को जन्म देती है लेकिन अगर वही प्रतिस्पर्धा को हम प्रेरणा का स्रोत बना लें तो हम अपना ध्यान सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर केन्द्रित कर सकते हैं। छात्रों को अपने साथियों से तुलना नहीं करनी चाहिए बल्कि उनको अपना रोल मॉडल बना कर उनसे पढ़ाई के गुर को अपनाना चाहिए। एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिए छात्रों की सकारात्मक सोच का मजबूत होना बहुत मायने रखता है।
छात्रों को अपनी गलतियों से सीखने की कला को समझ कर आगे उन गलतियों को न दोहराने पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए। चुनौतियाँ जीवन चक्र का हिस्सा है जो जीवन को निखारती है, और संवारती है।
"अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर ध्यान केंद्रित करें, अपने साथियों से प्रतिस्पर्धा न करें। अपने साथियों की सफलता को प्रेरणा स्रोत के रूप में इस्तेमाल करें। यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपका दिमाग भी स्वस्थ है, स्वस्थ शरीर होना महत्वपूर्ण है।"
श्री नरेंद्र मोदी
परीक्षा से पूर्व छात्रों का मानसिक दबाव में आना स्वाभाविक है लेकिन हमें किसी भी तरह के दबाव से बाहर निकलने में खुद को सक्षम बनाना चाहिए। कभी कभी परीक्षा से पूर्व कई बार ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं जिसके लिए खुद को तैयार करना पड़ता है। आत्मविश्वास से अपने लक्ष्य को साधकर अपने कार्य करते रहें। विद्यार्थी को उन कारणों को खोजना चाहिए जो उनके निराशा का कारण बन रहे हैं और उन्ही को किस तरह से खुद से दूर करने के विकल्प खोजने चाहिए। किसी भी प्रकार का भय या नकारत्मक विचार धारा को स्वयं के पास फटकने भी न दें। अपनी तैयारी पर भरोसा रखें और आत्मविश्वास से परीक्षा हॉल में प्रवेश कर
“अपनी तैयारी के बारे में आश्वस्त रहें। किसी भी प्रकार के दबाव के साथ परीक्षा हॉल में प्रवेश न करें।”
श्री नरेंद्र मोदी
बच्चों को तैयारी के दौरान छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए और धीरे-धीरे प्रदर्शन में सुधार करना चाहिए। इस तरह विद्यार्थी परीक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएंगे। अपने आप को समझें, अपने कमियों का आंकलन करें और उन्ही कमियों को अपनी ताकत बनाने में ध्यान केंद्रित करें। एक लक्ष्य को निर्धारित करने से पहले हमें खुद को समझना बहुत जरूरी है।
"हमें खुद को एक सीमा से आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। हमें इसे धीरे-धीरे, वृद्धि में करना चाहिए।"
श्री नरेंद्र मोदी
एक सशक्त देश के नींव की तो शिक्षा सर्वप्रथम और एकमात्र रास्ता है - शिक्षित भारत सशक्त भारत।
पढ़ाई के साथ साथ बच्चों को अपने रुचि वाले पाठ्येतर के लिए समय जरूर निकालना चाहिए। छात्र ऊर्जावान महसूस करेंगे और इससे उनका मन तनाव मुक्त रहेगा। खेल कूद उन्हें रोबोटिक या नीरस हुए बिना पढ़ाई में अधिक ध्यान केंद्रित करने में मदद करेंगे। अपनी पाठ्येतर रुचियों को समय जरूर दें। एक संतुलित टाइम टेबल बनाएं जिसमे आपके रुचि का खेल या आपके पसंदीदा शौक शामिल हो
छात्रों को समय प्रबंधन के गुर को सीखना होगा जिससे वे अपने कार्य एक बेहतर तरीके और समय अनुसार कर सकें। परिवार के साथ समय बताएं और अपने गैजेट्स से कम से कम एक घंटे की प्रतिदिन दूरी बनाए रखें। टेक्नोलॉजी की मदद पढ़ाई में लेना अच्छी बात है लेकिन इसका दुरुपयोग छात्रों से उनका बहुमूल्य समय और संसाधन छीन लेता है। समय के मोल को समझना और उसका सदुपयोग ही एक विद्यार्थी को हर कार्य करने में सहायक होता है।
असफलताएं प्रेरणा का स्त्रोत होती हैं। कोई एक असफलता का मतलब रुक जाना नहीं बल्कि उससे सीख़ लेकर आगे बढ़े। जीवन के उतार चढ़ाव का एक मजबूत मन से सामना करें। हर रुकावट को उज्ज्वल भविष्य की सीढ़ी के रूप में बदलने का प्रयास करना चाहिए।
"एक झटके का मतलब यह हो सकता है कि अभी सर्वश्रेष्ठ आना बाकी है।"
श्री नरेंद्र मोदी
एक विद्यार्थी के सफल होने में उनके माता पिता का सकारात्मक भाव रखना बहुत आवश्यक है। माता पिता का अपने बच्चों में विश्वास उनके मनोबल और आत्मविश्वास को मज़बूत करता है। उन्हें अपने बच्चों की तुलना किसी के साथ भी नहीं करनी चाहिए। अपने बच्चों से बात करें, उन्हें समझें और उन्हें प्रोत्साहित करें। माता-पिता की इच्छाएँ उनके बच्चों से निहित होनी चाहिए। माता पिता अपने सपनों और उम्मीदों का भार अपने बच्चों के कंधों पर न डालें बल्कि बच्चों की रुचि को जानने की कोशिश करें और उनका पूरे मन से समर्थन करें।
"माता-पिता अपने बच्चे के रिपोर्ट कार्ड को अपना विजिटिंग कार्ड न समझें।"
श्री नरेंद्र मोदी
देश को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाना, नई उम्मीदें हासिल करना, इन सब पर निर्भर है यह नई पीढ़ी। परीक्षा केवल एक महत्वपूर्ण कदम है जो एक विद्यार्थी के सामने अनगिनत अवसर खोल देती हैं। लेकिन यह भी समझना बहुत आवश्यक है कि अंक जीवन नहीं हैं और परीक्षा निर्णायक नहीं है। उम्मीद और आत्मविश्वास को अगर हर छात्र अपना साथी बना ले तो फिर अपने सपनों को पाना बहुत आसान होगा।
सरल व्यक्तित्व, सादा जीवन, कठिन परिश्रमी और शान्ति के दूत; जी हां यह कोई और नहीं बल्कि हमारे अपने गांधी जी और लाल बहादुर शास्त्री जी हैं जिनकी विचारधारा आज तक सभी के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है।
सरल जीवन, उच्च विचार,
कांपे अंग्रेज सुन शान्ति की ललकार।
देश के आगे और कुछ न सूझा,
लहराया विजयी पताका ऊंचा।
एकता और अखंडता का पाठ सिखाया,
न उठाई लाठी न कोई टकराया,
उनके धैर्य के आगे न कोई टिक पाया,
इतनी गौरवशील थी जिनकी काया।
आईए जानें महात्मा गांधी जी और लाल बहादुर शास्त्री जी के जीवन की ऐसी कई विशेषताएं जिनका यदि पूरी निष्ठा से पालन किया जाए तो व्यक्ति जीवन में सुखी रह सकता है।
लाल बहादुर शास्त्री अपनी उदात्त निष्ठा एवं क्षमता, विनम्रता, दृढ, सहिष्णु एवं जबर्दस्त आंतरिक शक्ति के लिए माने जाते हैं। देश के प्रधान मंत्री के रूप में उनकी दूरदर्शिता ने देश को प्रगति का मार्ग दिखलाया।
अनुशासन एक बहुमूल्य गुण है जो जीवन में कुशलता और आत्मविश्वास से आगे बढ़ने की क्षमता का सार्थक है। एक अनुशासित नागरिक अपने देश के कुशल भविष्य की अहम पूंजी है। ऐसी ताकत को परास्त करना नामुमकिन है।
पाठ १: अनुशासन की आदत जीवन को संवार देती है।
शास्त्री जी की सादगी और दृढ़ता का पाठ सबके लिए आज तक प्रेरणा का स्त्रोत है। देश के नागरिकों को एक दिशा दिखाने के लिए वे सर्वप्रथम खुद किसी कार्य को करने में सदा तत्पर रहते थे। देश के प्रधानमंत्री होने के नाते उन्होंने लोगों को सिखाने के लिए अपने आपको हर कार्य में आगे रखा।
पाठ २: किसी को अगर कोई बात सिखानी हो तो उस पर पहले खुद को अमल करना चाहिए।
शास्त्री जी का सर्वप्रथम उद्देश्य देश में शान्ति और खुशहाली का पाठ लोगों को सिखलाना था। शांत मन हर कठिन परिस्थिति से निकलने में सक्षम होता है। जब मन शांत होगा तभी एकाग्रता से कार्य कर पाएगा।
पाठ ३: हमें हर पल आंतरिक और बाहरी शान्ति को पाने की कोशिश करनी चाहिए।
सब साथ चलेंगे, सब साथ परिश्रम करेंगे तो पथरीले रास्ते भी आसानी से पर हो जाते हैं। एकता में जो शक्ति है वह और कहीं नहीं है, और यही कारण था की हमारा देश आजाद हो पाया।
पाठ ४: हर कार्य अकेले करना संभव नहीं होता। एकता की शक्ति सर्वोपरि है।
भारत में राष्ट्रपिता के नाम से लोकप्रिय महात्मा गांधी ने दुनिया भर के अरबों लोगों को उनके सिद्धांतों पर जीवन जीने के लिए प्रेरित किया है।
हम सभी ने देखा है कि गांधीजी की मानसिक शक्ति इतनी मजबूत थी कि जब दूसरे देशों में गांधीजी के बारे में सुनने वाले लोग अक्सर उनकी शारीरिक बनावट को देखकर आश्चर्यचकित रह जाते थे। बापू एक आदर्श उदाहरण हैं जो बताते हैं कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो भौतिक क्षमता की परवाह किए बिना पहाड़ों को भी हिलाया जा सकता है।
पाठ 1: जीवन में किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए अपनी मानसिक शक्ति मजबूत रखें।
अगर प्रयास पूरे मन से किया जाय तो जीत निश्चित है। हां, गांधीजी के जीवन ने हमें सिखाया कि प्रयासों में संतुष्टि ही जीवन की कुंजी है। हालाँकि हमारे देशवासियों ने आज़ादी के लिए वर्षों तक संघर्ष किया, लेकिन निरंतर प्रयासों से ही यह संभव हो सका। यदि आप विजयी परिणाम चाहते हैं तो अपना 100% देते रहें।
पाठ 2: अंत में विजयी परिणाम के लिए अपने प्रयासों में संतुष्टि रखें।
गांधीजी एक ऐसे व्यक्ति थे जिनकी कुछ जरूरतें नहीं थीं और वह अपने हमेशा चमकते मुस्कुराते चेहरे के साथ एक खुशहाल जीवन जीते थे। कठिनतम परिस्थितियों में भी उन्होंने अपनी आवश्यकताओं को सरल रखा। इससे उनका ध्यान देश के अन्य ठोस मुद्दों पर केंद्रित रहता था।
पाठ 3: जीवित रहने के लिए पर्याप्त होना खुशी की कुंजी है।
गांधी जी स्वाभिमान के साथ अपनी उपलब्धियों के लिए जाने जाते हैं।
स्वाभिमान, स्वयं से प्रेम करना है। जब हम खुद का सम्मान करते हैं और अपने कार्यों को महत्व देते हैं तभी कोई व्यक्ति आत्मविश्वास के साथ कई चीजें हासिल कर सकता है। एक विनम्र व्यक्ति को अपनी आंतरिक शक्ति को जानने के लिए किसी झूठी प्रशंसा की आवश्यकता नहीं होती है। इसलिए स्वयं को पहले रखें और देखें कि परिस्थितियाँ कैसे बदलती हैं।
पाठ 4: आत्मसम्मान जीवन जीने की कुंजी है।
सुखी जीवन जीने के लिए गांधीजी और शास्त्री जी के सिद्धांत उल्लेखनीय हैं और इन्हें जीवन में अपनाना चाहिए। यह अमूल्य बातें पीढ़ी-दर-पीढ़ी आशा, स्वतंत्रता, भक्ति, सच्चाई और आत्म-सम्मान पैदा करती हैं। आइए हम सभी खुशहाल जीवन जीने के लिए उनके कुछ सिद्धांतों का पालन करने का प्रयास करें और स्वयं से वादा करें की हम यह सीख अपने आने वाली पीढ़ी को अपना कर उनके लिए एक उदहारण बनें।
जब हम बात करते हैं एक सशक्त देश के नींव की तो शिक्षा सर्वप्रथम और एकमात्र रास्ता है किसी देश के विकास और उज्ज्वल भविष्य का। शिक्षा का हाथ थामे आज भारत ने सभी क्षेत्रों में अपनी सफलता के पर्चे लहराएँ हैं। हर जगह एक ही गूँज है शिक्षित भारत सशक्त भारत।
“शिक्षा न केवल वह नींव है जिस पर हमारी सभ्यता का निर्माण हुआ है, बल्कि यह मानवता के भविष्य की शिल्पकार भी है” - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी
शिक्षा हमें सिखाती है कि हम अपने ज्ञान और अनुभव के साथ जीवन की अनगिनत स्थितियों पर कैसे प्रतिक्रिया दें। हम सभी इस बात से सहमत होंगे कि शिक्षा से प्राप्त ज्ञान को जीवन के हर कार्यों पर लागू किया जा सकता है, फिर चाहे सीखे गए सबक सदियों पुराने ही क्यों न हो।
वास्तविक शिक्षा वही है जो छात्रों को सुखी और स्वतंत्र जीवन जीने के लिए प्रेरित करे। क्या हम सभी जो सीखते हैं उसे क्रियान्वित नहीं करना चाहते हैं और किसी संगठन में समान विचारधारा वाले लोगों के सहयोग से उसे लागू नहीं करना चाहते हैं।
आइये देखें कैसे बच्चों में देश भक्ति की भावना जगा सकते हैं।
शिक्षा वह है जो स्कूल में सीखी गई बातों को भूल जाने के बाद भी बची रहती है।” ~अल्बर्ट आइंस्टीन. अल्बर्ट आइंस्टीन का यह कितना गहन विचार था जो आज तक सत्य है। औपचारिक शिक्षा में हम जो सीखते हैं वह सिक्के का सिर्फ एक पहलू है, दूसरा पहलू उसे विचारों और कार्यों के माध्यम से लागू करना है। शिक्षा शून्य को भरती है और उसे किसी उद्देश्य के लिए उपयोग में लाती है। शिक्षा के साथ जीवन में उद्देश्य खोजने से अवसरों के विशाल द्वार खुलते हैं। आपको उस स्ट्रीम में शिक्षित होने की आवश्यकता नहीं है जो लोकप्रिय है या सिर्फ इसलिए कि आपके साथी इसे चुन रहे हैं, इसके बजाय किसी को उस स्ट्रीम का अध्ययन करना चाहिए जहां वह भविष्य में उसी के उपयोग से संबंधित हो सके।
“सच्चा ज्ञान विनम्रता देता है, विनम्रता से योग्यता आती है, योग्यता से धन प्राप्त होता है, धन व्यक्ति को अच्छे कर्म करने में समर्थ बनाता है और यही आनंद लाता है” - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी
“हमारा लक्ष्य बेहतर प्रशासन के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना होना चाहिए” - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी
शिक्षा हमारा नेतृत्व करती है बहुत सारी बारीकियों को समझने के लिए। आइए जानें शिक्षा की भूमिका:
*आधुनिक भारत के विकास के लिए
*सांस्कृतिक और वैज्ञानिक मूल्यों के संश्लेषण के लिए
*अंतर्राष्ट्रीय समझ को बढ़ावा देने में
*धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण विकसित करने में
*लोकतांत्रिक मूल्यों के विकास में
*सामाजिक एवं प्राकृतिक एकीकरण को बढ़ावा देने में
*समाज के समाजवादी स्वरूप की स्थापना में
शिक्षा समग्र विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने की एक अहम सीढ़ी है। शिक्षा सीखने और संस्कृति का विस्तार करने का एक तरीका है। शिक्षा हमें बेहतर ज्ञान, स्वास्थ्य, जीवन स्तर, सामाजिक न्याय और दक्षता से मानव स्थिति की उन्नति के द्वार खोल देती है जो सामाजिक परिवर्तन के प्रमुख संकेतक हैं। हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि हर नागरिक को शिक्षा का समान अवसर प्राप्त हो
शिक्षित भारत ही सशक्त भारत की ऊर्जा है। इस ऊर्जा को सदा ज्वलंत रखना हर एक भारतीय की जिम्मेदारी है। ज्ञान देश की एकता, मानवता, और राष्ट्र में बुराइयों को समाप्त करने का माध्यम होना चाहिए।
तुम इतना जो मुस्कुरा रही हो,
क्या गम है जिसको छुपा रही हो…….
आप सोच रहे होंगे मैं यह गाना क्यों गुनगुना रही हूँ। हमारे गीतों में और बोली में हम न जाने कितने भाव व्यक्त करते हैं।
हमारी सार्वजनिक दुनिया या वर्चुअल वर्ल्ड में विभिन्न भावों को दर्शाते पीले गोल मटोल चेहरे नहीं होते तो क्या होता। आपने सही समझा, मैं यहाँ इमोजी की बात कर रही हूँ।
हम सब जानते हैं कि अपने आपको अभिव्यक्त करना सार्वजनिक दुनिया में कितना जरूरी हो गया है। हम क्या सोच रहे हैं, कौनसी बात हम कैसे रखना चाहते हैं और कैसे सही मायने में बात हमारे अपनों तक पहुँच पाए यह बहुत आवश्यक है।
जब हम आमने सामने नहीं होते हैं तो यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि दूसरों के भाव हमारे भाव से मेल खा रहे हैं या नहीं। जैसे उदाहरण के तौर पर एक सोशल ग्रुप के कई सदस्य कुछ बातों को हँसी मज़ाक में लेते हैं, तो किसी किसी को वही बात बुरी लग जाती है। इसका सबसे बड़ा कारण यह कि आप किस भाव में वह मैसेज पढ़ रहे हैं। यहाँ आपका काम आसान करने के लिए इमोजी का आविष्कार हुआ।
अपने मैसेज में इमोजी को शामिल करने से कम से कम हम दूसरों को यह बता रहे हैं कि मैसेज को किस भाव या एक्सप्रेशन से पढ़ना है। तो है न एक छोटा सा इमोजी बहुत काम की चीज!
आजकल के युवा इस वर्चुअल एक्सप्रेशन से ही घिरे रहते हैं। पर ध्यान रहे की आपकी इमोजी का एक्सप्रेशन आपके एक्सप्रेशन से मेल खा रहा हो। कई बार वर्चुअल चैट में ऐसा भी होता है कि हमारे इमोजी हमारे भाव से मेल नहीं खाते। ना चाहते हुए भी कई बार हम बस कुछ रिएक्ट करने की होड़ में खुद से ही दूर हो जाते हैं।
तो फिर यह गीत तो बनता है,
तुम इतना क्यों मुस्कुरा रही हो
क्या गम है जिसको छुपा रही हो……
आप कहेंगे ऐसा तो कई बार रियल वर्ल्ड में भी हो जाता है। बिल्कुल होता है, लेकिन आप ज्यादा देर तक ढ़ोंग नहीं कर सकते और दूसरे भी आपकी दिल की बात को समझ जाते हैं क्यूंकि वे आपके असली भाव को भाँप लेते हैं। लेकिन वर्चुअल वर्ल्ड में जहाँ हम एक दूसरे को देख नहीं सकते वहां यह तय करना बहुत कठिन हो जाता है।
अगर हम एक क्षण के लिए भी सोचें की अगर चेहरे पर भाव ही नहीं दिखते तो क्या होता। में तो कहूंगी की हम सब फिर एक रोबोट की तरह लगते।
हमारे भाव बहुत कुछ कह जाते हैं। एक वक्ता अपने भाषण को जीवंत बनाने के लिए स्वरों की विविधता तथा चेहरे के भाव का उपयोग करता है। तभी तो श्रोताओं को उनको सुनने में रुचि होती है।
एक छोटी सी मुस्कुराहट कभी-कभी पूरे दिन की ऊर्जा बन जाती है। कितने विचित्र हैं यह भाव जो न जाने कितने राज़ छुपा जाते हैं और बहुत कुछ बिना कहे बता भी देते हैं। सच तो यह है कि हमारे मन के आईने हमारे भाव हैं और फिर चाहे असली दुनिया हो या वर्चुअल वर्ल्ड हमें जुड़ने और एक दुसरे को समझने के लिए भाव या इमोजी ही काम आते हैं।
इमोजी का रंग पीला क्यों होता है?
हम सब जानते हैं इमोजी की बात आते ही पीले गोल मटोल चेहरे पर तरह तरह के भाव हमारे सामने आ जाते हैं।
पर क्या आप जानना चाहेंगे पीले रंग का राज़?
पीला रंग प्रतीक होता है खुशी का, उल्लास का और इसीलिए यह रंग हमारी आंखों को आकर्षित करता है। पीला रंग विभ्योर के पिरामिड में पाँचवे स्थान पर आता है जिसकी वजह से यह रंग बहुत दूर से भी दिखाई देता है।
यह भी माना जाता है कि पीला रंग हमारे त्वचा से भी बहुत मेल खाता है इसीलिए इमोजी का रंग पीला चुना गया है।
सबसे पहली इमोजी कौनसी सी थी?
सबसे पहली इमोजी मुस्कुराने वाले भाव की थी। स्माइली चेहरे के डिज़ाइन में वास्तविक मुस्कान एक सकारात्मक व्यवहार को प्रभावित करने का काम करती है।
कहाँ और कब जन्म हुआ इमोजी का?
इमोजी का यह प्रसन्न चेहरा असल में एक बीमा उधोग की देन है। अक्सर लोग बीमा करवाने कई विपरीत परिस्थितियों में ही जाते हैं तो यह कंपनी अपने ग्राहकों को खुशी के दो पल देने के लिए इस आकर्षित करने वाले पीले प्रसन्न चेहरे को अपनी कंपनी का हिस्सा बनाया। तो इस तरह पीले स्माइली चेहरे का जन्म 1963 में वॉर्सेस्टर, मैसाचुसेट्स में हुआ।
वहाँ से इस स्माइली चेहरे ने बहुत सफर तय किए और और आज यह हमारे फोन में हमारे करीब हैं।
तो मुस्कुराते रहिए इस स्माइली इमोजी की तरह और देखिए जिंदगी कितनी आसान और खुश हाल हो जाएगी।
बदलाव जीवन का स्त्रोत है, और अच्छा बदलाव जीवन की परिभाषा ही बदल देता है।
लेकिन हमने अक्सर देखा है कि हम किसी भी प्रकार के बड़े छोटे बदलाव को अपनाने से डरते हैं। हम हमेशा हिचकते हैं कुछ नया अपने जीवन में शामिल करने से, या फिर किसी चीज़ का अपने जीवन से त्याग करने से।
फिर चाहे वह एक तुच्छ बदलाव ही हो। शायद ऐसा इसीलिए है क्योंकि हमें लगता है कि क्या नया स्वरूप अच्छा होगा? इसके परिणाम कैसे होंगे? फिर हमारी नकारात्मक ऊर्जा बहुत तीव्र हो जाती है और फिर हम उसी समय सारणी के साथ चलते रहते हैं।
बदलाव बड़े स्तर पर हो या बहुत छोटा, हर नई चीज़ अपने साथ नई चुनौतियाँ लाती है। किन्तु यह सब कुछ पलों के लिए या फिर कुछ दिनों के लिए ही होता है, लेकिन उनके सकारात्मक प्रभाव हमें बाद में ही पता चलते हैं।
हम सबको यही सोचकर चलना चाहिए कि जो कुछ भी होता है अच्छे के लिए ही होता है। इसी सोच को अपना मित्र बनाकर कार्य करते रहने चाहिए। हर नए पल को दोनों हाथों से बटोर कर उसका भरपूर आनंद लेना चाहिए।
तो चलिए जानें वो पाँच आदतें जो आपके जीवन में बदलाव ला सकती हैं:
१. अपने लक्ष्य को लिखें
२. अपना पसंदीदा काम करें
३. अच्छी सोच रखें
४. ना बोलना सीखें
५. अपने आप पर विश्वास रखें
छोटे लक्ष्य बनाएँ, जिन्हें तय करना सरल हो। जैसे अपने काम को तय समय में ख़त्म करना या फिर जो कार्य आप बहुत समय से करना चाहते हैं उसे पूर्ण करना।
जब हमारे कार्य लिखित में हमारे सामने होते हैं तो वे हमें एक चुनौती जैसे दिखाए देते हैं। कार्य पूर्ण होने पर जब हम उस कार्य पर टिक लगाते हैं तो बहुत उत्साहित महसूस करते हैं। साथ ही आप अपने लिस्ट के अगले लक्ष्य की ओर तुरंत केंद्रित हो जाते हो।
अक्सर ऐसा होता है की हम उन कार्यों में उलझ कर रह जाते हैं जो हमें कम पसंद होते हैं और हमारे रुचि के कार्यों के लिए समय ही नहीं निकाल पाते। लेकिन अगर कुछ ठान लें तो फिर कुछ भी नामुमकिन नहीं होता। जब आप अपने लक्ष्यों को लिखें तो उसमें अपने पसंदीदा काम को ज़रूर शामिल करें। फिर देखें कैसे इस बदलाव से आपमें नई ऊर्जा आ जाती है।
आप कैसे हैं, यह आपकी सोच पर निर्भर करता है। यह बिल्कुल सत्य है; आपकी सोच आपके व्यक्तित्व को संवारती है। सकारात्मक सोच रखने वाले लोग कभी नए बदलाव से घबराते नहीं है, बल्कि उन चुनौतियों का डट कर सामना करते हैं। सकारात्मक विचार जीवन की नींव होते हैं, और हमें अपनी नींव को हिलने नहीं देना है।
जब हम बदलाव की बात कर रहें हैं तो बदलाव हमेशा कार्यों को कौशलता से करना या नए कार्यों को शामिल करना मात्र ही नहीं होता है। किन्तु कुछ कार्यों को त्यागना या फिर मना कर देना भी बदलाव का हिस्सा है।
किसी भी चीज़ के लिए कभी कभी ना कहना कठिन हो जाता है। लेकिन प्राथमिकता कार्यों को पूर्ण करने की ही नहीं बल्कि उन्हें अपनी गति से और अपने पसंदीदा काम को शामिल करना होना चाहिए। कभी कभी हम खुद को इतना व्यस्त कर लेते हैं कि हम इतने सारे कार्यों को संभाल ही नहीं पाते। अपने कार्यभार को केंद्रित रखें और साथ ही साथ अपने पसंदीदा कार्य के लिए समय ज़रूर दें।
कहते हैं कि सोच लेने से दुनिया बदल जाती है परन्तु यह पूर्ण सत्य नहीं है। आपको अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होकर काम भी करना पड़ता है और वो भी अपने आप पर अटल विश्वास के साथ। मान लीजिए की यह एक महत्वपूर्ण पूँजी है बदलाव की।
Importance of change in Life
बदलाव का पालन करना कठिन हो सकता है पर नामुमकिन नहीं। परिवर्तन का स्वागत करें, कभी-कभी कुछ नया करने की कोशिश एक उज्ज्वल परिप्रेक्ष्य का स्वागत कर सकती है। एक फलते-फूलते बदलाव का स्वागत करने के लिए समय रहते डर और दिनचर्या पर काबू पाना होगा क्योंकि यह आपके रास्ते को और अधिक सुंदर और बेहतर बना सकता है।
जीवन में हमेशा तीखे मोड़ वाले रास्ते होते हैं, लेकिन हमारे वाहन में बदलाव जिसे मन कहा जाता है, हर मोड़ को आसान बना सकता है। इस प्रकार, परिवर्तन और कुछ नहीं बल्कि एक बेहतर व्यक्ति के रूप में कायापलट करने के लिए अपनी प्राथमिकताओं को पुनर्गठित करना, परिष्कृत करना, नए सिरे से ढ़ालना है। असफलताओं को एक अलग दृष्टिकोण से देखें, आपको निश्चित रूप से एक नई शुरुआत मिलेगी जो केवल आपकी प्रतीक्षा कर रही है।
हर नया साल अपने साथ नई ऊर्जा को लेकर आता है जो हमारे जीवन में उजियारा करते हैं। तो आईये क्यों न हम इस नूतन वर्ष में कुछ सकारात्मक परिवर्तन की पहल करें और उन्हें पूर्ण करने की पूरी कोशिश करें। अपने आप से किये हुए वादे निभाएं और अपनों को भी उनके लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करें।
हर नया साल अपने साथ नई ऊर्जा, नए विचार, नई चुनौतियां और सबसे महत्वपूर्ण नए संकल्प लेकर आता है। साल की शुरुआत में एक नई ऊर्जा हमारे भीतर एक लहर की तरह चलती है और इनबॉक्स बहुत सारी शुभकामनाओं से भर जाता है।
कई नए साल की शुभकामनाएं एक सवाल के साथ आती हैं "इस साल क्या संकल्प या रेजोल्यूशन होगा?" यूं तो साल की शुरुआत में संकल्प लेना अनिवार्य नहीं है लेकिन दुनिया भर में कई लोग इस प्रथा का पालन करते हैं। एक साथ अनुष्ठान करने से आप बेहतर महसूस करते हैं और आप इसके बारे में दृढ़ संकल्पित रहते हैं। ठीक वैसे ही जैसे कई लोग अपने शौक या जुनून का पालन करने के लिए समुदायों और मंचों का निर्माण करते हैं।
संकल्प या रेजोल्यूशन लेने की प्रथा बड़ों में ही नहीं बल्कि बच्चों में भी बहुत मशहूर है। मुझे याद है जब मैं स्कूल में थी, हम सभी दोस्त संकल्प रखते थे और आपस में यह भी जाँच करते थे कि किसने इसे तोड़ा तो नहीं। कुछ वाक्पटुता या खेल गतिविधियों में भाग लेने के रूप में संकल्प लेते थे और कुछ संकल्प ग्रेड में सुधार के लिए निर्धारित किया करते थे।
लेकिन ज्यों-ज्यों वर्ष बीतते जाते हैं संकल्पों के प्रति हमारी गंभीरता बदलती जाती है। यदि आप अपना संकल्प सकारात्मक रूप से पूरा करते हैं तो आप अगले वर्ष दूसरा संकल्प लेने की ओर अग्रसर हो जाते हैं। और यदि आप इसे आधे रास्ते में ही छोड़ देते हैं तो आप कहते हैं कि आप इसके प्रति गंभीर नहीं थे।
संकल्प चाहे जो भी हो, मुख्य बात यह है कि जब तक आप इसे पूर्ण नहीं कर लेते, तब तक प्रयास करते रहना चाहिए। बहुत से लोग इसे नाम मात्र के लिए लेते हैं, और कुछ लोग अपने संकल्प को पूरा करने के बोझ से खुद को तनाव से घेर लेते हैं।
कुछ लोग इसी धारणा का पालन करते हैं कि नए साल पर कोई न कोई संकल्प लेना आवश्यक है और बिना विचार किए बस ऐसे ही कुछ भी रेजोल्यूशन ले लेते हैं। और इसी कारण कई संकल्प पहले महीने के अंत तक मर जाते हैं, और कुछ लोग भूल जाते हैं कि उन्होंने क्या संकल्प लिए थे।
संकल्पों के साथ उत्तरोत्तर गति करना दर्शाता है कि आप इसके प्रति कितने दृढ़ हैं। और ऐसा करने के लिए आप कुछ आसान तरीके अपना सकते हैं।
रेजोल्यूशन को पूर्ण करने में हम अपनी थोड़ी मदद कर अपनी मंजिल पा सकते हैं।
जब आप कोई संकल्प लेते हैं तो आप इसके बारे में सबको बताएं। अपने परिवार, दोस्तों को बताएं और आप अपने संकल्प की घोषणा करने के लिए आप सोशल नेटवर्किंग साइटों का उपयोग भी कर सकते हैं। ऐसा करने से वे आपको आपकी चुनौती की याद दिलाते रहेंगे। ऐसा हो सकता है कि आपको कई लोग बार - बार टोकें, लेकिन खुद को शब्दों से प्रभावित न होने दें बल्कि अपने कार्यों से उनका उत्तर दें।
अपने संकल्प से संबंधित तस्वीरें एकत्रित करें और उन्हें अपने वॉर्डरोब में और अपने बाथरूम के दरवाजे पर चिपकाएं ताकि वे आपको इसे प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते रहें। उदाहरण के लिए अगर आप फिट रहने का संकल्प लेते हैं तो ऐसे लोगों के चित्र चिपकाएं जिन्होंने यह मुकाम हासिल कर रखा हो।
आप स्वयं भी अपने रेजोल्यूशन की जांच करने के लिए अपने फ़ोन में कैलेंडर की रिमाइंडर सेवा का उपयोग करें, या ऐसी एप्लिकेशंस का उपयोग कर सकते हैं जो हमें जरूरी चीजें याद दिला सके। इस तरह आप अपने प्रदर्शन का आंकलन कर रहे हैं।
हालाँकि आपकी चुनौती को जीतने के लिए 365 दिन हैं, लेकिन एक तिथि ज़रूर निर्धारित करें। यदि समय सीमा निकटतम पर सेट है तो आप अधिक मेहनत करेंगे।
जैसे ही आप लक्ष्य प्राप्त कर लेते हैं तो अपने आप को उपहार के साथ पुरस्कृत करें। अपने सभी प्रियजनों को बताएं कि आपने वह हासिल कर लिया है जिसकी आप कामना करते थे।
तो अब आप एक संकल्प लेने के लिए तैयार हैं, इसे सहज तरीके से लागू करें और उपलब्धि की खुशी का आनंद लें।
और अपनी पोस्ट खत्म करने से पहले मैं अपना संकल्प साझा करना चाहता हूं, मैं अपने उभरते हुए ब्लॉग को एक पेड़ की तरह विकसित करना चाहता हूं और आप सभी इसे संभव कर सकते हैं।
बच्चों की रंगीन दुनिया बहुत निराली है, सरल और सहज। काश हम बड़ों के दिल भी इतने सुंदर होते कि बच्चों की तरह हम हर हाल में खुश रहते। क्यों न बच्चों के रंग में रंग जाएँ, चलो आज हम बड़े भी बच्चे बन जाएँ।
चारों ओर बच्चे हों और माहौल में कोई मज़ा नहीं, यह एक दुर्लभ परिदृश्य है। बच्चे घर की जान होते हैं, उनके मासूम सवाल सबकी बोलती बंद कर देते हैं, वे हर छोटी चीज़ की परवाह करते हैं, एक बहुत छोटी चीज़ उन्हें प्रेरित करती है, और उनका कोमल दिल हर एक के साथ समान व्यवहार करता है। हां, एक बच्चा हमारा गुरु होता है और उन चीजों की याद दिलाता है जो बड़े होने पर धुंधली हो जाती हैं।
इन गुणों ने मुझे विभिन्न पहलुओं पर सोचने पर मजबूर किया जिन्हें हम बड़े जिंदगी की सीख बना सकते हैं।
एक बच्चे की पूरी क्षमता अपरिहार्य है, उनकी मासूम हरकतें हमें कई मौकों पर हैरान कर देती हैं। "थका हुआ" शब्द एक बच्चे के शब्दकोश में शामिल नहीं है। उन टिमटिमाती आँखों में परिवेश का पता लगाने का जुनून किसी भी तुलना से परे है। रॉबर्ट ब्रॉल्ट का कथन बिलकुल सहज है कि, "दुनिया उतनी ही नई है जितनी हमारे जीवन में बच्चे हैं।"
एक बच्चे का दिल किसी और चीज को नहीं जानता और हर एक को एक मजबूत विश्वास के साथ प्यार करता है। बच्चे सुरक्षित महसूस करते हैं यदि वे अपने प्रियजनों से घिरे होते हैं और बिना शर्त भरोसा करते हैं। बच्चों का अटूट भरोसा रिश्ते की नीव को बहुत मज़बूत बनाते हैं।
क्या आपने कभी गौर किया है कि बच्चे अपने दोस्तों के साथ कितना अच्छा व्यवहार करते हैं। और मस्ती के साथ नखरे और झगड़ा उनके खेल का हिस्सा है। ज्यादातर एक बच्चा वही चाहता है जो दूसरे के पास है, या वे एक विशेष सीट के लिए लड़ सकते हैं, लेकिन कुछ ही मिनटों के भीतर वे फिर से खेलना शुरू कर देते हैं जो कि एक बच्चे के जीवन की अद्भुत विशेषता है। आशा है कि हम बड़े भी यह ख़ास गुण अपनाएं और क्षमा कर कुछ ही सेकंड में चीजों को नए सिरे से शुरू करें। मैरिएन विलियमसन ने बहुत उपयुक्त रूप से उद्धृत किया, "बच्चे खुश हैं क्योंकि उनके दिमाग में 'सभी चीजें जो गलत हो सकती हैं' जैसी नाम की कोई फाइल नहीं है।"
बच्चा आकाश में तारों को छूना चाहता है और उसे पकड़ने की कोशिश भी करता है, जैसे-जैसे हम बूढ़े होते हैं कई व्यावहारिक तथ्य हमारी कल्पना को बांधते हैं और हम सीमाओं के भीतर सोचने की कोशिश करते हैं। आइए हम और अधिक रचनात्मक बनें और सीमाओं से खुद को मुक्त कर जीवन को जिएं।
छोटे बच्चे बिना किसी डर के वर्तमान क्षण का आनंद लेते हैं। और हम बड़ों को भी यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि हर कोई खुश रहे और हर क्षण का आनंद लें। ज्यादा सोच विचार बहुत सारी बेड़ियां खोल देता है और इन्हीं छोटी छोटी चीजों में हम बड़े कभी कभी यह महत्वपूर्ण बातें भूल जाते हैं।
एक बच्चा चीजों को जटिल नहीं करता है; वे सीधे और दिल से सच्चे होते हैं। उनका सदाचार ही सब कुछ ठीक कर देता है। किसी स्थिति को उलझाने के बजाय हमेशा समाधान खोजने का प्रयास करना चाहिए।
एक बच्चा हमें कई महत्वपूर्ण चीजें सिखा सकता है जिसे हम बड़े होने पर भूल जाते हैं; यह बच्चे ही हैं जो हमें हमारे कर्तव्यों की याद दिलाते हैं और हमें तरोताजा रखते हैं। हम बड़े अपनी युवा ब्रिगेड को कई तरह के जीवन के पाठ पढ़ाते हैं लेकिन बदले में यह नन्हे बच्चे हम बड़ों को बहुत कुछ सिखा जाते हैं। जीवन में कुछ भी सीखने का कोई अंत नहीं है; एक छोटी सी बात हमें जीवन की गहराई सिखा सकती है। एंजेला श्विंड्ट ने बहुत खूबसूरती से उद्धृत किया "जबकि हम अपने बच्चों को जीवन के बारे में सब कुछ सिखाने की कोशिश करते हैं, हमारे बच्चे हमें सिखाते हैं कि जीवन क्या है।"
तो आइए इस बाल दिवस पर, हम फिर से दिल से बच्चे बनें और जीवन का भरपूर आनंद लें।
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काश मैं उस जली हुई दाल को ठीक कर पाती।
काश उस दोस्त का दिल नहीं दुखाया होता।
मुझे इस तरह के बोल नहीं बोलने चाहिए थे।
काश सारी गलतियाँ करी ही न होती।
क्या ऐसे विचार कभी आपके भी मन में उत्पन्न हुए हैं?
यह सामान्य बात है, मनुष्य गलतियों को देख कर उस पर अफ़सोस मनाता है और सोचता है कि काश ऐसा कुछ हुआ ही नहीं होता। अपने दोष को सोच कर बहुत दुःखी होता है और अक्सर सारी घटनाओं को बहुत ही नकारात्मक दृष्टिकोण से देखने लगता है। उसे उसके गलत कार्य का बहुत पछतावा होता है। और अपने जीवन की घडी को पीछे घुमा कर वह उन गलतियों को सही करना चाहता है। मानो की जीवन में डिलीट बटन होता और वह अपनी गलती पूरी तरह मिटा सकता और यह अपेक्षा रखता कि जीवन में खुशहाली छा जाती।
पर क्या ऐसा होना सही होता? क्या आपने इस पर कभी समीक्षा की है?
ज़रा सोचिए अगर आपके जीवन से सारी गलतियाँ हटा दी जाए तो सबकुछ बिल्कुल सही हो जाएगा। जीवन का हर पड़ाव बड़ी सरलता से पार हो जाता, न कोई टोकता और न कोई कुछ कह पाता।
पर क्या ऐसा संभव है ?
फिर क्या आप कह सकते कि आपको जीवन का अनुभव है?
मनुष्य अपनी गलतियों से सीख लेकर ही आगे बढ़ता है और अपने दोष को दूर करता है। परंतु कोई भी गलती करना नहीं चाहता वो बस हो जाती हैं। क्या इसका होना सही है?
गलतियों से हमें जो सीख मिलती है और समझ मिलती है वो हमें कभी प्राप्त ही नहीं होती ना ही जीवन में हमें वो सारे अनुभव होते जो हमें गलतियों से सीखने पर होते है। अगर आप साइकिल चलाना सीखते हैं तो कई बार गिरते भी हैं, तो क्या बिना गिरे आप कोई भी प्रयास पूर्ण कर सकते हैं ? नहीं में उत्तर आएगा, त्रुटियाँ भी उसी प्रकार होती हैं धीरे - धीरे आपको गुणी बनाती है। यही गुण - दोष जीवन को सँवारते हैं और अनुभवी बनाते हैं।
अनुभव के साथ साथ हमें गलतियों से एक और महत्वपूर्ण चीज की प्राप्ति होती है। आप सोच रहे होंगे कि गलतियों से ऐसा क्या मिलता है पर अगर आप जानेंगे तो आप समझेंगे की गलतियां हमें जीवन का वो फ़लसफ़ा दे जाती है जो जीवन के स्वर्ण पदक भी नहीं दे सकते। गलतियां हमें हौसला देती है।
हाँ, जब हम गलती करते हैं तो हम अपने जीवन के सफ़र में कई कदम पीछे हो जाते है, परंतु सफ़र में बने रहने और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हम डटे रहते हैं हौसलों के साथ। इस हौसले से हम जीवन की कोई भी मुश्किल को हस्ते-हस्ते पार कर लेते है क्यूँकि इस हौसले से हमें हिम्मत प्राप्त होती है।
हिम्मत अगर बनी रहे तो मनुष्य पहाड़ जैसी कठिनाई को भी पार कर लेता है।
गलतियों से एक और सबक मिलता है, वह है संयम का। जी हाँ! संयम का स्थान जीवन में कई ऊँचा है, इसलिए हमें भी उसका साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए। अगर आप धैर्य यानी संयम से अपने काम करें और वार्तालाप के समय सोच समझ कर बोलें तो आपकी कथनी और करनी में कभी अंतर नहीं आएगा। अक्सर मनुष्य शीघ्रता में ऐसे काम कर जाते हैं जो उन्हें बाद में पछतावे की ओर ले जाते हैं। आपकी गलतियों से आपको संयम का पाठ मिलता है, जिसका पालन करने से आप गलती को दोहराते नहीं हैं।
अब आपने जान लिया होगा क्यूँ हर एक बच्चा गिर कर ही चलना सीखता है? क्यूँकि, उसके माता पिता भी जानते है कि गिरकर संभलने से बच्चा अपने आप कई बातें सीख रहा है। तो अगर अब आपसे कभी गलती हो जाए तो पछतावे के साथ यह भी याद रखें कि आपने गलती के साथ एक अनुभव किया, सबक़ लिया और हिम्मत जुटाई फिर से उस काम को पूरी क्षमता से पूर्ण करने की।
गलतियों से सीख तभी मिल सकती है जब हम अपनी गलतियों को स्वीकारें। तो जीवन में डिलीट बटन की प्रतीक्षा ना करें, अपने आप सफलता का रास्ता बनाएँ। गलतियाँ गति रोधक हो सकती हैं पर रास्ते की रुकावट नहीं।
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