इस कहानी को पढ़ने से पहले इसके भाग १ - ख़ुशबू चोर का आनंद लेने के लिए यहाँ जाएँ।
सरला अब उस बात का आनंद ले रही थी और कहा ‘तू ख़ुद ही देख लेना जब तू शनिवार को आदि बाबा के जनमदिन में आएगा “ |
“हाँ, शनिवार को है उसका बर्थ्डे, बताय था आदि ने मुझे २ हफ़्ते पहले फूटबाल ग्राउंड में जहाँ उनके दोस्त मेरे दोस्त के साथ खेलते है “, बंटी ने गर्व भारी आवाज़ में कहा।
बंटी पूरे हफ़्ते सोचता रहा ऐसा कौनसा ख़ुशबू चोर है जो ना पाव भाजी, गुलाब जामुन, पास्ता, पिज़्ज़ा और इतने सारे नाश्ते की ख़ुशबू को बड़े आसानी से चुरा लेता है सबकी आँखों से बच कर।
जैसे ही शनिवार आया उसने आदि की पसंद के पेन को एक नयी किताब के साथ बखूबी सजा दिया उपहार के रूप में।
सरला तो दोपहर से ही तैयारी करवाने चली गयी थी और बंटी अपने २-३ दोस्तों के साथ आदि के घर पहुँचा जो की एक आलीशान सॉसाययटी में था, वो पहले भी कई बार वहाँ के पार्क में आदि के बुलाने पर खेलने के लिए आया करता था । वहाँ के कर्मचारी भी उसे पहचानते थे, आख़िर सरला को काम करते हुए ४ साल हो चुके थे।
घर में ज़ोरों से गाने की आवाज़ आ रही थी और जैसे ही घर का दरवाज़ा खुला, गानों का स्तर और ऊँचा हो गया। आदि बंटी और उसके दोस्तों को देख कर बहुत खुश हुआ, गले लगाय और कहा, "आओ तुम्हें मिलवाता हूँ अपने और दोस्तों से"। सरला ने बंटी को देखा और मुस्कुरतें हुई किचन की ओर बढ़ी, उसे पता था बंटी सबके साथ अच्छे से घुल मिल जाता है और आदि बाबा का प्रिय भी है।
सभी बच्चे मस्ती से एक के बाद एक खेल खेलने लगे और फिर अंत में जादूगर के कार्यक्रम के लिए शांति से शर्बत का ग्लास लेकर बैठ गए।
बंटी ने सोचा यह सही मौक़ा के ख़ुशबू चोर के बारे में पता लगने का, जहाँ इतने स्वादिष्ट भोजन बने हैं वहाँ कोई ख़ुशबू क्यूँ नहीं आ रही है, बस हवा में इत्र की ख़ुशबू है।
सरला किचन में थालियों में भोजन को सजा रही थी, आचानक बंटी आकार बोला, “माँ कहाँ है वो ख़ुशबू चोर, बता मुझे भी। मैं तो पहचान नहीं पाया“|
सरला बहुत ज़ोर से हँस पड़ी, "ख़ुशबू चोर कोई इंसान नहीं है, तूने सबको शक भारी आँखों से देखा?", यह कह कर अपना दुपट्टा मुँह में दबाए ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी।
"माँ, हँसती रहेगी क्या?", बंटी अब थोड़ा झल्लाया क्यूँकि उसने जो सोचा वैसे कुछ नहीं था।
"माँ जल्दी बता फिर वो क्या चीज़ है जो ख़ुशबू चुराती है?, मुझे जादूगर का खेल भी तो देखना है"।
सरला ने बड़े से गैस स्टोव के ऊपर की ओर इशारा करते हुए कहा, “यह रहा तुम्हारा ख़ुशबू चोर जो सारे खाने की ख़ुशबू को चुरा लेता है और किचन के बाहर पता ही नहीं पड़ता कि खाने में क्या बना है"।
"यह क्या है?", बंटी उसकी और देखने लगा, सरला ने उसको गोद मैं उठा कर समझाया कि कैसे धीरे - धीरे या ज़ोरों से यह चीज़ खाने से आने वाली ख़ुशबू चुरा लेती है। इसका नाम चिमनी है।
बंटी अपनी माँ की ओर देख कर अब ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा और कहा, "माँ यह तो बड़ी अनोखी चीज़ है, मैंने सोचा हमीद की तरह यहाँ कोई होगा",और सोच सोच कर हँस रहा था कि उसने आदि के सभी दोस्तों को कैसे शक भरी निगाहों से देखा। हँसते - हँसते वो जादू के खेल का आनंद लेने किचन से बहार चला गया।
आज बंटी के मन में शांति थी और आँखों मैं चैन, पर हर घर कहाँ एक जैसा होता है।
इस कहानी के पहले भाग - ख़ुशबू चोर का आनंद लेने के लिए यहाँ जाएँ।