विविध संस्कृतियों का तालमेल, समृद्ध विचारधारा , मूल्यवान इतिहास, बहादुर लोग, विविध प्राकृतिक संसाधन, पारम्परिक रंगों से सजा पहनावा, भव्य विरासत, बहुआयामी व्यंजन इत्यादि उपरोक्त पंक्तियों को सुनकर हम अपने देश भारत से बहुत आसानी से जोड़ देते हैं।
भारतीय संस्कृतियों और मूल्यों की यह भव्यता हर पीढ़ी को पता होनी चाहिए और यह तब संभव हो सकता है जब हम बच्चों को राष्ट्र के लिए अपना योगदान देने के लिए शामिल करते हैं। उन्हें उचित औचित्य के साथ संस्कृति और परंपराओं के मूल्य से परिचित कराना हमारा सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य है।
केवल राष्ट्रीय दिवसों पर देशभक्ति दिखाने के लिए खुद को प्रतिबंधित करने के अलावा, हमें प्रत्येक दिन हमारे राष्ट्र के प्रति प्यार और देखभाल करने की आदत डालनी होगी। हम सभी अपने जीवन में कुछ सरल अभ्यास कर सकते हैं ताकि राष्ट्र में एक महत्वपूर्ण योगदान जोड़ा जा सके और हमारी अगली पीढ़ी को सिखाया जा सके।
संविधान हमारे राष्ट्र की नींव है और यह हमें अपने राष्ट्र और स्वयं के प्रति काम करने की दिशा देता है। माता-पिता के रूप में हम अपने बच्चों को इसके विभिन्न तत्वों को सरल उदाहरणों से समझने में मदद कर सकते हैं। सुभद्रा सेन गुप्ता द्वारा लिखित बच्चों के लिए 'भारत का संविधान' संविधान की प्रत्येक विशेषता को स्पष्ट करने के लिए एक आदर्श रंग मुद्रित पुस्तक है।
हाँ, राष्ट्र के प्रति प्रेम और सम्मान को दर्शाने का यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण तरीका है। सामान्य कानून जैसे यातायात नियमों का पालन करना, अपनी आस पास की जगहों को साफ रखना, समय पर कर का भुगतान करना कुछ ऐसे उदाहरण हैं जो हमें राष्ट्र के विकास में योगदान करने में मदद कर सकते हैं। हम बच्चों को सिखा सकते हैं कि प्रतिदिन इन नियमों का पालन करके हम कानूनों का पालन कर रहे हैं जो राष्ट्रों को सुचारू रूप से चलाने में मदद करते हैं।
राष्ट्र नागरिकों के लाभ के लिए काम करता है और सरकारी निकाय योजना को क्रियान्वित करने मैं मदद करते हैं। अगर सरकार द्वारा कोई नीति पेश की जाती है तो उसे सीधे खारिज करने के बजाय हमें उसके उज्जवल पक्ष को देखना चाहिए। उदाहरण के लिए शिक्षा नीति में हालिया बदलाव NEP 2020 ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव किए हैं, माता-पिता को अपने बच्चों के साथ नीति के लाभ पर चर्चा करने की आवश्यकता है। देश के बारे में सकारात्मक पुष्टि देने से देश के प्रति प्रेम और सम्मान बढ़ता है।
समुद्र में एक बूंद मायने रखती है और यह राष्ट्र के संबंध में किए गए सभी कार्यों की नींव है। बच्चों को यह सिखाना कि यदि लोगों का एक समूह समय पर अपने कर्तव्यों का पालन करता है तो वह राष्ट्र के सुचारू संचालन में मदद करता है जो एक बहुत बड़ा काम है और यह छोटे छोटे योगदान कोई भी कर सकता है। इसी तरह बच्चों को कर भुगतान के महत्व और आय से उनके छोटे योगदान से देश में बड़े बदलाव की संभवता को सिखाता है।
बच्चों को दो तरह की बहादुरी से परिचित करवाना भी माता पिता का कर्त्तव्य है। पहला हमारे भारतीय सैनिकों की दृढ़ निष्ठा और असीम बहादुरी जो हमें सुरक्षित रखती है। और दूसरी हमारे दैनिक जीवन में देश के प्रति हमारे योगदान जो हमें 'हर दिन हीरो' का ताज पहनाती है। जैसे परिवेश को स्वच्छ रखना, जरूरतमंदों की मदद करना, नियम-कायदों का पालन करना, राष्ट्र के बारे में बात करते समय जिम्मेदार होना, संविधान का सम्मान करना; ये सभी छोटे बहादुरी के कार्य हैं जिन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में भी प्रदर्शित किया जा सकता है। माता-पिता इसका एक उदाहरण स्थापित कर सकते हैं और बच्चों को राष्ट्र के लिए उनके महत्व को समझा सकते हैं।
भारत संस्कृति और विरासत की समृद्ध भूमि है और इसे महत्व देकर हम उस इतिहास की रक्षा में योगदान दे रहे हैं जो कभी हमारे देश में लिखा गया था। राष्ट्रीय स्मारकों और विरासत स्थलों पर जाने से बच्चों को इन स्मारकों को लंबे समय तक जीवंत रखने के लिए किए गए प्रयासों का महत्व समझाया जा सकता है। किताबें बच्चों को विभिन्न संस्कृतियों के बारे में सिखाने में बहुत मददगार हो सकती हैं और सोनिया मेहता गतिविधि पुस्तक श्रृंखला 'डिस्कवर इंडिया' पर अच्छी तरह से शोध किया गया है जो बच्चों को मज़ेदार तरीके से सीखने में मदद करती है।
इन सभी प्रथाओं को बच्चों को पढ़ाना आसान नहीं है और न ही यह एक दिन का काम है, हम बड़ों को अपने दैनिक जीवन में इन्हें करने की आवश्यकता है। बच्चे माता पिता का आयना होते हैं। अपने माता-पिता को अपने देश की समृद्धि के लिए पूरे दिल से अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए देख वे निश्चित रूप से भारत के जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं।
These simple ways can surely inculcate a habit of patriotism in kids and makes them responsible citizens. It is elders responsibility to inculcate a habit of patriotism in kids.
सुबह की सुहावनी धूप में कीर्ति चाय की चुस्कियाँ ले रही थी। यह समय उसके लिए बहुमूल्य था, वकालत की दौड़-भाग को भूल कुछ क्षण अपने लिए चुरा लिया करती थी।
कीर्ति को विष्णु की गुहार सुनाई दी। “आज नंदा का बेटा इस समय यहाँ कैसे?”, चाय का प्याला हाथ में लिए आँगन की और अपने कदम जल्दी जल्दी बढ़ाने लगी। कीर्ति के आँगन की ओर बढ़ते कदमों को रश्मी ने अचानक रोका, "माँ, आज यह कुर्ता जरूर ऑर्डर कर देना, आज सेल का आखिरी दिन है। मुझे कॉलेज जाने के लिए देरी हो रही है, मैं चलती हूँ"। "रश्मी की फरमाइशें कब खत्म होंगी?", सोचते हुए कीर्ति आंगन में पहुँची।
नंदा उसके यहाँ काम करती थी, समय की पाबंद, सफ़ाई में अव्वल, यही खूबियों वाली सहायक चाहिए थी कीर्ति को। ६ साल का विष्णु काँपते स्वर में रट लगाकर अपनी माँ से ज़िद कर रहा था, "अम्मा, मैं आज स्कूल जाऊँगा, वहाँ आज मटर पुलाव मिलेगा"। “क्यों नहीं, मैं स्वयं तुम्हें छोड़ आऊँगी, तुम्हारा स्कूल नहीं छूटेगा", भारी मन से नंदा ने उत्तर दिया।
"नंदा, लगता है तुम्हारे बेटे को पढ़ाई में बहुत रुचि है", कीर्ति ने मुस्कुराते हुए कहा। उसने विष्णु को जैसे ही थपथपाया, वह समझ गयी यह तपन गर्मी की नहीं, बुख़ार की है। “विष्णु की तबीयत ठीक नहीं है, इसे तो तेज बुख़ार है", कीर्ति ने नंदा और विष्णु को घर के भीतर आने को कहा।
नंदा तुरंत विष्णु को गोद में लेकर भीतर आ गयी। कीर्ति ने जल्द ही गरम दूध और नाश्ते की प्लेट नंदा को थमाई और दवाई ढूँढ़ने लगी, “विष्णु को इतना तेज बुख़ार है और तुम उसे स्कूल भेजना चाहती हो ?“
विष्णु ने पराठे को २ भागों में बाँटा और अपनी माँ के साथ नाश्ता करने में मग्न हो गया। ५-६ निवालों के बाद नंदा की आँखों से आँसू छलकने लगे और बड़े ही भारी मन से कीर्ति की ओर देखा। कीर्ति समझ गयी की बात गम्भीर है, उसने विष्णु को दवाई पिलायी और सोफ़े पर लेटा दिया और खुद नंदा के पास जा बैठी।
नंदा ने रोते हुए बताया, "परसों मेरा पति मुझ बेड़ौल को छोड़, २० वर्षीय सुंदर लड़की के साथ सारे रुपए लेकर भाग गया, घर में २ दिन से खाना नहीं बना है। विष्णु स्कूल जाकर ही अपना पेट भरता है"।
बिना कुछ आगे पूछे कीर्ति ने नंदा को २००० का नोट थमा दिया, "तुम चिंता मत करो, विष्णु का ध्यान रखो"।
कीर्ति को समझ नहीं आया आख़िर किसकी भूख सबसे बड़ी है? "क्या मेरी समय की भूख़, या रश्मि की इच्छाओं की भूख या फिर उस नन्हे विष्णु के पेट की भूख, या नंदा के पति की पैसों की भूख"।
कीर्ति अपने चाय के आधे भरे प्याले को एक तरफ रख, कोर्ट के लिए रवाना हो गई।
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