Archives

September 14, 2023
धूपछांव विचारों का मंच - हिन्दी दिवस

अभिव्यक्ति का परचम हिन्दी, संस्कृति की जननी हिन्दी, निश्चल और निराली हिन्दी, अंतर्मन की तस्वीर हिन्दी | अपनी भाषा करो अपनी भाषा पर प्यार।जिसके बिना मूक रहते तुम,रुकते सब व्यवहार। जिसमें पुत्र पिता कहता है, पत्नी प्राणाधार,और प्रकट करते हैं जिसमें तुम निज निखिल विचार। बढ़ाओ बस उसका विस्तार।करो अपनी भाषा पर प्यार। भाषा बिना […]

Read More
April 30, 2026
ज़रूरत इन लम्हों की

बरामदे में रखी पुरानी लकड़ी की कुर्सी हर शाम की तरह आज भी दादाजी का इंतज़ार कर रही थी। सूरज ढल रहा था, और आसमान के रंग धीरे-धीरे सुनहरे से नारंगी होते जा रहे थे। तभी आँगन में भागते हुए छोटे-छोटे कदमों की आहट गूंजी। “दादाजी!” आरव ने जोर से पुकारा और उनके गले से […]

Read More
April 29, 2026
यस मैडम जी!

सुबह की हल्की ठंडी हवा में जब बस स्टैंड के पास धूल धीरे-धीरे उठती थी और चाय की केतली से उठती भाप में अदरक की खुशबू घुलकर जैसे किसी पुराने दिन की याद बन जाती थी, तब आशा हमेशा की तरह उसी कोने में खड़ी होती, हाथ में पुराना-सा बैग, बाल सलीके से बंधे हुए, […]

Read More
April 28, 2026
ज़ेरॉक्स की ज़िंदगी

एक छोटे से मोहल्ले में आरव और विवान दो दोस्त रहते थे। दोनों की उम्र लगभग बराबर थी, स्कूल भी एक ही था और क्लास भी। लोग उन्हें “जुड़वां” कहकर बुलाते थे, क्योंकि वे हर जगह साथ ही दिखते थे। आरव खेल-कूद में बहुत अच्छा था फिर चाहे वो दौड़ हो, क्रिकेट हो या फुटबॉल। […]

Read More
April 27, 2026
वानखेड़े स्कोरबोर्ड की आत्मकथा

नमस्कार, मैं हूँ वानखेड़े का स्कोरबोर्ड।आप मुझे हर कुछ पलों में देखते हैं, पर शायद ही कभी सोचते हैं कि मैं भी कितनी कहानियाँ अपने भीतर सँभाले खड़ा हूँ, धूप, बारिश, शोर, सन्नाटे और इनके बीच बदलते हुए अंक। एक समय था जब मुझे हाथों से चलाया जाता था। कोई सीढ़ी चढ़कर नंबर पलटता था, […]

Read More
April 25, 2026
वेल्लोर का कॉलेज

दो साल की कड़ी मेहनत के बाद आज वो दिन था, रिज़ल्ट का दिन और राजेश की उम्मीदों का दिन। घर में अजीब सी खामोशी थी। सबकी नज़रें उस लैपटॉप स्क्रीन पर टिकी थीं, जहाँ एक नंबर उनकी किस्मत तय करने वाला था। माँ चुपचाप भगवान से प्रार्थना कर रही थीं, अप्पा बार-बार घड़ी देख […]

Read More
April 24, 2026
उम्मीदें कावेरी अम्मा की

आज भी रोज़ की तरह कावेरी अम्मा भोर में उठीं। आसमान हल्का नीला हो रहा था और दूर पहाड़ियों के पीछे से सूरज झाँकने की कोशिश कर रहा था। आश्रम एक छोटे-से गाँव के किनारे बना था जिसके चारों तरफ नीम और पीपल के पेड़, बीच में कच्चा आँगन, और किनारे पर मिट्टी-ईंटों से बना […]

Read More
April 23, 2026
टोमैटो भात

कावेरी के किनारे बसा गाँव कुम्भकोणम हर सुबह जैसे मुस्कुराकर उठता था। नारियल के पेड़ों के बीच से छनकर आती धूप, धान के खेतों में झुकती हवा, और दूर मारीअम्मन मंदिर की घंटियाँ, सब मिलकर दिन की शुरुआत को एक उत्सव बना देते थे। इसी गाँव में दो दोस्त थे, शिवा और राघवन। दोनों की […]

Read More
April 22, 2026
समुद्र के किनारे एक दिन…

पुरी के समुद्र तट पर उस शाम हवा में नमक की एक हल्की सी खुशबू घुली हुई थी। आसमान धीरे-धीरे अपने रंग बदल रहा था नीले से सुनहरे, और फिर हल्के नारंगी में ढलता हुआ। दूर कहीं मछुआरों की नावें वापस लौट रही थीं, और उनके पीछे-पीछे उड़ते पक्षियों की आवाज़ें हवा में घुल रही […]

Read More
April 21, 2026
रोडमल का रौब

गाँव की धूल भरी पगडंडियों, कच्चे घरों की कतारों और शाम ढलते ही लौटते मवेशियों के बीच एक नाम बहुत ही मशहूर था, रोडमल। उसका चलना भी ऐसा था मानो हर कदम ज़मीन पर नहीं, लोगों के दिलों पर पड़ रहा हो; ऊँची कद-काठी, तनी हुई घनी मूँछें, आँखों में हमेशा एक कठोर चमक, और […]

Read More
1 2 3 … 9
linkedin facebook pinterest youtube rss twitter instagram facebook-blank rss-blank linkedin-blank pinterest youtube twitter instagram